ट्रम्प और इराकी पीएम जैदी की मुलाकात ने तेहरान को क्यों दिया बड़ा झटका

ट्रम्प और इराकी पीएम जैदी की मुलाकात ने तेहरान को क्यों दिया बड़ा झटका

एक हफ्ते पहले वह ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शवयात्रा में शामिल होकर शोक मना रहे थे। इसके ठीक कुछ दिन बाद वह वाशिंगटन के ओवल ऑफिस में डोनाल्ड ट्रम्प के ठीक बगल में बैठकर मुस्कुराते हुए हाथ मिला रहे थे।

इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल जैदी की इस कूटनीतिक कलाबाजी ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। For a different view, check out: this related article.

जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमले चल रहे हों, तब इराक जैसे देश के मुखिया के लिए दोनों पक्षों को साधना आसान नहीं होता। लेकिन जैदी ने वही किया जो आज के समय में इराक के अस्तित्व के लिए जरूरी है। ट्रम्प ने इस मुलाकात के दौरान जैदी की जमकर तारीफ की और उन्हें एक "नया चैंपियन" बताया। हालांकि, इस पूरी मुलाकात के पीछे छिपी राजनीति और इरादों की परतें इतनी सरल नहीं हैं जितनी वे कैमरे के सामने दिखती हैं।

ट्रम्प की गलतफहमी या सोची-समझी रणनीति

व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने जैदी का जिस गर्मजोशी से स्वागत किया, उसने कूटनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। ट्रम्प ने दावा किया कि जैदी ने एक बेहद कड़े चुनाव में शानदार और निर्णायक जीत हासिल की है। Related reporting on this matter has been provided by Reuters.

मजेदार बात यह है कि जैदी का नाम चुनाव के बैलेट पेपर पर था ही नहीं।

दरअसल जैदी कोई मंझे हुए राजनेता नहीं हैं। वह एक अरबपति व्यवसायी रहे हैं और बैंकिंग सेक्टर से आते हैं। इराक के पिछले संसदीय चुनाव के बाद जब महीनों तक सरकार बनाने को लेकर गतिरोध बना रहा, तो वे एक समझौते के तहत सामने आए उम्मीदवार थे। इस राजनीतिक गतिरोध के पीछे खुद ट्रम्प प्रशासन का बड़ा हाथ था। ट्रम्प ने ईरान समर्थक नूरी अल-मलिकी के नाम पर सीधा वीटो लगा दिया था और चेतावनी दी थी कि अगर मलिकी प्रधानमंत्री बने तो अमेरिका इराक को दी जाने वाली सभी मदद रोक देगा।

इराक के राजनीतिक गुटों को मजबूरन एक ऐसे चेहरे को चुनना पड़ा जो अमेरिका और ईरान दोनों के लिए स्वीकार्य हो। जैदी इसी समझौते की उपज हैं। ट्रम्प ने इसी वजह से ओवल ऑफिस में गर्व से कहा, "याद रखिए, मुझे पता था कि मैं क्या कर रहा हूं। यह व्यक्ति मध्य पूर्व में एक महान नेता बनने जा रहा है"।


ईरान पर अमेरिकी हमलों के बीच बगल में बैठे रहे जैदी

इस यात्रा का सबसे तनावपूर्ण और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पल वह था जब कैमरे चल रहे थे और ट्रम्प ईरान पर अमेरिकी हमलों और नौसैनिक नाकेबंदी को जारी रखने की बात कर रहे थे। उस समय इराकी प्रधानमंत्री उनके ठीक बगल में शांत बैठे थे।

यह एक बेहद शक्तिशाली और चौंकाने वाली तस्वीर थी।

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एक ऐसे देश का प्रधानमंत्री जिसके संबंध ईरान के साथ बहुत गहरे हैं, वह अमेरिकी राष्ट्रपति के मुंह से ईरान को तबाह करने की बातें सुन रहा था और उसने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस बात को नोट किया। उनका मानना है कि जैदी का इस बातचीत के दौरान चुपचाप बैठे रहना यह दिखाता है कि वह ईरानी विरोध की परवाह किए बिना खुद को अमेरिका के करीब खड़ा करने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इराक रातोंरात ईरान का दुश्मन बन गया है। बगदाद के विश्लेषकों का कहना है कि इराक केवल अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को बचा रहा है। वे जानते हैं कि अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य गुस्से से बचने के लिए उन्हें वाशिंगटन को खुश रखना ही होगा।


30 सितंबर की समयसीमा और मिलिशिया का पेंच

अमेरिका और इराक के बीच सबसे बड़ा विवाद इराक में सक्रिय ईरान-समर्थक मिलिशिया गुटों को लेकर है। अमेरिकी और इजरायली बलों द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के जवाब में इन मिलिशिया गुटों ने अमेरिकी ठिकानों पर दर्जनों रॉकेट और ड्रोन हमले किए हैं।

इराक सरकार ने इन गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को हथियार सौंपने और पूरी तरह से शांत होने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया है।

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  • जैदी का रुख: उन्होंने वाशिंगटन में साफ कहा कि इस समयसीमा के बाद इन गुटों के वजूद का कोई कानूनी आधार नहीं रहेगा।
  • मिलिशिया का पलटवार: ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के गठबंधन 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' ने जैदी की इस अमेरिकी यात्रा का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे देश के संसाधनों को अमेरिकी कंपनियों के हाथों में नहीं सौंपने देंगे।
  • खतरनाक खेल: जैदी के लिए इन मिलिशिया गुटों पर नकेल कसना आसान नहीं होगा। वे सीधे तौर पर इराक की सुरक्षा और राजनीति में घुसे हुए हैं। अगर जैदी ने जबरन कार्रवाई की, तो देश के भीतर ही गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

तेल और निवेश का बड़ा दांव

जैदी वाशिंगटन केवल कूटनीतिक बातें करने नहीं गए थे। वह अपने साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लेकर गए थे। एक पूर्व बैंकर और बिजनेसमैन होने के नाते वे जानते हैं कि ट्रम्प को कैसे प्रभावित किया जा सकता है।

जैदी ने अमेरिकी कंपनियों को इराक के ऊर्जा, तेल, गैस और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में प्राथमिकता देने का वादा किया है। वे अमेरिकी निवेश के जरिए देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभालना चाहते हैं। इसके अलावा, इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को भी सुरक्षित तरीके से पूरा करना उनकी प्राथमिकता है।

इराकी पीएम का यह दौरा दिखाता है कि इराक अब केवल एक युद्धक्षेत्र बनकर नहीं रहना चाहता। जैदी की कोशिश इराक को एक संप्रभु और आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाने की है, जो अपनी नीतियां खुद तय कर सके। लेकिन सवाल यही है कि क्या तेहरान और उसके वफादार मिलिशिया कमांडर जैदी को इस रास्ते पर इतनी आसानी से आगे बढ़ने देंगे? आने वाले कुछ हफ्ते इराक और पूरे मध्य पूर्व का भविष्य तय करेंगे।

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Miguel Green

Drawing on years of industry experience, Miguel Green provides thoughtful commentary and well-sourced reporting on the issues that shape our world.