कीर स्टार्मर ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है। सोमवार, 22 जून 2026 को आए इस बड़े राजनीतिक फैसले ने लंदन से लेकर दिल्ली तक सबको चौंका दिया। पिछले दो साल से उनकी लोकप्रियता लगातार गिर रही थी और अपनी ही लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बाद उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। अब हर कोई यही पूछ रहा है कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा और इस रेस में सबसे आगे कौन चल रहा है।
ब्रिटेन की राजनीति पिछले दस सालों में इतनी अस्थिर रही है कि यह देश अब अपने सातवें प्रधानमंत्री का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। स्टार्मर के जाने के बाद लेबर पार्टी के अंदर नेतृत्व की जंग तो शुरू हुई है, लेकिन इस बार की रेस बाकी सालों जैसी बिखरी हुई नहीं दिख रही। You might also find this connected story insightful: Why The New Douglas Head Conservation Status Actually Matters For Property Owners.
जमीन पर नजर रखने वाले जानते हैं कि मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम इस समय सबसे मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। उन्होंने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर संसद में वापसी की है। उनके आते ही पार्टी के दूसरे बड़े नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी उनके नाम का समर्थन कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि बर्नहैम बिना किसी कड़े विरोध के सीधे 10 डाउनिंग स्ट्रीट की तरफ बढ़ सकते हैं।
संकट में लेबर पार्टी और स्टार्मर की विदाई
स्टार्मर की विदाई अचानक नहीं हुई। जब दो साल पहले लेबर पार्टी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, तब लोगों को लगा था कि 14 साल के कंजर्वेटिव शासन के बाद देश को एक मजबूत नेतृत्व मिलेगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। महंगाई बेलगाम होती गई और बुनियादी सरकारी सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। जनता के बीच यह संदेश गया कि स्टार्मर सिर्फ बातें करते हैं, फैसले नहीं ले पाते। As reported in recent coverage by NPR, the effects are worth noting.
हाल ही में हुए स्थानीय चुनाव के नतीजों ने आग में घी का काम किया। लेबर पार्टी को देश भर में करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी के लगभग एक चौथाई सांसदों ने खुलकर स्टार्मर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनके ऊपर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने वाशिंगटन में ब्रिटिश राजदूत के रूप में पीटर मैंडेलसन को नियुक्त किया, जिनके पुराने रिश्ते विवादित रहे थे। इन तमाम गलतियों ने स्टार्मर की साख को पूरी तरह खत्म कर दिया।
पार्टी के भीतर यह डर साफ दिखने लगा था कि अगर स्टार्मर के नेतृत्व में अगला आम चुनाव लड़ा गया, तो लेबर पार्टी पूरी तरह साफ हो जाएगी। सांसदों की बगावत और गिरती रेटिंग के कारण स्टार्मर को रोते हुए 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपने इस्तीफे का एलान करना पड़ा।
एंडी बर्नहैम क्यों हैं इस रेस में सबसे आगे
ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका जवाब इस समय एंडी बर्नहैम के चेहरे में साफ दिखाई दे रहा है। 56 साल के बर्नहैम को ब्रिटिश राजनीति में एक अलग तरह का नेता माना जाता है। वे सूट-बूट की जगह साधारण टी-शर्ट पहनने और आम लोगों की भाषा में बात करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 2017 से ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में काम किया और वहां के परिवहन और रोजगार व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया।
बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे लंदन के संभ्रांत राजनीतिक हलकों से दूर रहकर अपनी जमीन तैयार करते हैं। उन्होंने मैनचेस्टर को एक नई पहचान दी और यही वजह है कि वे आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। जब वे मेकरफील्ड सीट से चुनाव मैदान में उतरे, तो उन्होंने अप्रवासन विरोधी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' के उम्मीदवार को बुरी तरह हराया। इस जीत ने साबित कर दिया कि वे चुनाव जीतना जानते हैं।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जहां दूसरे लेबर नेताओं की रेटिंग माइनस में चल रही है, वहीं बर्नहैम की नेट अप्रूवल रेटिंग प्लस छह है। सांसदों को पता है कि अगर पार्टी को बचाना है, तो बर्नहैम जैसे चेहरे को आगे करना ही होगा।
वेस स्ट्रीटिंग का पीछे हटना और बर्नहैम का रास्ता साफ होना
शुरुआत में माना जा रहा था कि वेस स्ट्रीटिंग बर्नहैम को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। स्ट्रीटिंग लेबर पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े के एक मजबूत नेता हैं और उनकी अपनी एक अच्छी फैन फॉलोइंग है। लेकिन बर्नहैम की मेकरफील्ड में हुई ऐतिहासिक जीत के बाद पासा पलट गया।
स्ट्रीटिंग ने समझदारी दिखाते हुए खुद को इस रेस से बाहर कर लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र जारी कर साफ कहा कि वे बर्नहैम की दावेदारी का समर्थन करेंगे। इस एक फैसले ने पूरी बाजी बदल दी। अब लेबर पार्टी के भीतर बर्नहैम को चुनौती देने वाला कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा है। अगर कोई और उम्मीदवार सामने नहीं आता है, तो जुलाई के अंत तक एंडी बर्नहैम आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद की शपथ ले लेंगे।
एंजेला रेनर की भूमिका भी होगी अहम
इस पूरी राजनीतिक उथल-पुथल में एक और नाम है जिस पर सबकी नजरें हैं, वह है एंजेला रेनर का। रेनर लेबर पार्टी की पूर्व उप-प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ बहुत मजबूत है। हालांकि टैक्स विवादों के कारण उनकी छवि पर थोड़ा असर पड़ा था, लेकिन वे अभी भी पार्टी के भीतर एक बड़ा प्रभाव रखती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेनर खुद इस बार प्रधानमंत्री पद की रेस में नहीं कूदेंगी। वे बर्नहैम के साथ मिलकर काम करना पसंद करेंगी। अगर बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो रेनर को सरकार में कोई बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना तय है। इन दोनों की जोड़ी लेबर पार्टी को फिर से खड़ा करने की ताकत रखती है।
मैनचेस्टरवाद बनाम लंदन की पुरानी राजनीति
एंडी बर्नहैम जिस राजनीति की वकालत करते हैं, उसे वे खुद "मैनचेस्टरवाद" कहते हैं। यह एक ऐसी सोच है जो लंदन के केंद्रीकृत शासन को चुनौती देती है। बर्नहैम का मानना है कि देश की नीतियां सिर्फ लंदन के वातानुकूलित कमरों में बैठकर नहीं बननी चाहिए, बल्कि उन इलाकों को ध्यान में रखकर बननी चाहिए जिन्हें सालों से सरकारों ने नजरअंदाज किया है।
अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने साफ कहा था कि वे देश में 'ट्रिकल-डाउन इकोनॉमिक्स' यानी ऊपर से नीचे की तरफ बहने वाली अर्थव्यवस्था को खत्म करेंगे। उनका तर्क सीधा है कि अमीर और अमीर होता जा रहा है, लेकिन उसका फायदा नीचे के गरीब तबके तक कभी नहीं पहुंचता। वे देश भर में सस्ती बिजली, बेहतर सरकारी बस और ट्रेन सेवाएं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा कर रहे हैं।
हालांकि उनके आलोचक यह भी कहते हैं कि एक तीन लाख की आबादी वाले शहर को संभालना अलग बात है और सात करोड़ की आबादी वाले देश को चलाना बिल्कुल अलग बात है। आलोचकों का सवाल है कि बर्नहैम जिन बड़ी योजनाओं की बात कर रहे हैं, उनके लिए पैसा कहां से आएगा। लेकिन इस समय देश की जनता बदलाव चाहती है और बर्नहैम की बातें उन्हें उम्मीद देती हैं।
नए प्रधानमंत्री के सामने खड़ी होंगी ये बड़ी चुनौतियां
चाहे बर्नहैम प्रधानमंत्री बनें या कोई और, आने वाले नेता का रास्ता कांटों भरा होने वाला है। ब्रिटेन इस समय इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। घरेलू मोर्चे पर महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी समस्या है। नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) पूरी तरह चरमरा चुकी है, मरीजों को इलाज के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है।
घरेलू समस्याओं के अलावा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी ब्रिटेन की साख दांव पर लगी है। अमेरिका और यूरोप के साथ ब्रिटेन के संबंध एक नाजुक मोड़ पर हैं। दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। स्टार्मर का ज्यादातर समय विदेशी मामलों को संभालने में ही निकल गया, लेकिन वे कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाए। नए प्रधानमंत्री को तुरंत इन मोर्चों पर काम करना होगा और यह साबित करना होगा कि ब्रिटेन अभी भी दुनिया का एक बड़ा खिलाड़ी है।
आगे क्या होने वाला है
लेबर पार्टी के नियमों के मुताबिक, नए नेता के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 9 जुलाई से शुरू होगी। अगर बर्नहैम के खिलाफ कोई खड़ा नहीं होता, तो वे जुलाई के आखिरी हफ्ते तक प्रधानमंत्री बन जाएंगे। लेकिन अगर पार्टी के भीतर किसी छोटे गुट ने भी कोई उम्मीदवार खड़ा किया, तो यह मामला सितंबर तक खिंच सकता है, क्योंकि फिर पार्टी के सभी सदस्यों को वोट डालना होगा।
ब्रिटेन के इस पूरे संकट को समझने के लिए आपको केवल अखबारों की सुर्खियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। आपको ब्रिटिश संसद की गतिविधियों और लेबर पार्टी के आधिकारिक बयानों पर नजर रखनी चाहिए ताकि आप समझ सकें कि आने वाले दिनों में वहां की नीतियां किस तरफ मुड़ने वाली हैं। बदलाव की शुरुआत हो चुकी है और अगले कुछ हफ्ते ब्रिटेन का भविष्य तय करने वाले हैं।